2020 का शासनादेश बना बाधा
बोर्ड सचिव का आदेश जारी होते निजी विद्यालय संचालक व शिक्षक जनप्रतिनिधि इस पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि 13 अप्रैल, 2020 को शासन ने छह, सात, आठ, नौ और ग्यारह कक्षा के छात्र-छात्राओं को प्रमोट करने का निर्देश दिया था। ऐसे में कक्षा नौ के अंक वास्तविक कैसे हो सकते हैं? वहीं, बोर्ड सचिव का कहना है कि सभी कालेजों में बोर्ड परीक्षाओं से पहले ही कक्षा नी व 11 की वार्षिक परीक्षाएं हो चुकी थी और अंकपत्र भी दिए गए हैं।
शासन व यूपी बोर्ड प्रशासन ने हाईस्कूल के करीब 30 लाख परीक्षार्थियों को प्रमोट करने का रास्ता खोज लिया है। अब कक्षा नौ का रिजल्ट इसका आधार बनने जा रहा है। यानी छात्र या छात्रा ने कक्षा नौ में जो अंक अर्जित किए हैं, विषयवार वही अंक देकर उन्हें प्रमोट करने की तैयारी है। बोर्ड सचिव ने = जिला विद्यालय निरीक्षकों से 24 मई ■ तक अंक वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया है। असल में, सभी माध्यमिक कालेज वार्षिक परीक्षा का अंकपत्र अनिवार्य रूप से परीक्षार्थियों को देते आ रहे हैं।
वहीं, प्रोबोर्ड कराने में कुछ जिलों को छोड़कर अन्य ने उत्साह नहीं दिखाया। इसीलिए स्कूल संचालक विरोध कर रहे थे। अंक अपलोड करने की समय सीमा बढ़ाने पर भी वास्तविक अंक नहीं मिल पा रहे थे।
शासन के निर्देश पर बुधवार की यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने नया आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि कक्षा नौ की वार्षिक परीक्षा पिछले साल स्कूलों में हुई थी। विषयवार लिखित व प्रयोगात्मक परीक्षा के पूर्णांक व प्राप्तांक परिषद की वेबसाइट पर 24 मई तक अपलोड कर दिया जाए। लिखित परीक्षा के प्राप्तांक के लिए संबंधित विषय का पूर्णांक 70 अंक है व प्रोजेक्ट कार्य का विषयवार पूर्णांक 30 अंक है। सचिव ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को आदेश दिया है कि इस कार्य को शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराएँ। सूचना देना अनिवार्य है। यदि कोई कालेज अंक वेबसाइट पर अपलोड नहीं करता है तो वहां के डीआइओएस जिम्मेदार होंगे।
माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी) । बोर्ड) ने सीबीएसई की तर्ज पर हाईस्कूल की परीक्षा निरस्त करने व 1 परीक्षार्थियों को प्रमोट करने पर मंथन शुरू किया। बोर्ड हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाएं हर साल कराता रहा है, इसके सिवा उसके पास वार्षिक व - अर्ध वार्षिक परीक्षा का कोई रिकार्ड ॐ नहीं है। ऐसे में पहले तय हुआ कि हाईस्कूल की छमाही व प्रीबोर्ड परीक्षाओं के अंक के आधार पर प्रमोट ६ किया जाए, लेकिन बीते वर्ष कोरोना काल में स्कूल अक्टूबर व नवंबर 1 में पाबंदियों के बीच खुले थे ऐसे में छमाही परीक्षा कहीं हुई ही नहीं
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